टूटी-फूटी
एक गृहिणी की डायरी...
Saturday, July 13, 2019
जब तुम भागोगी
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हम ताली बजायेंगे तब, जब तुम भागोगी! तुम आजाद हो भागो, तेज भागो, और तेज भागो, हम गर्व करेंगे तुम्हारे भागने पर, शोर-शराबे भी करेंगे,...
Monday, October 1, 2018
ईश्वर पुलिस को सद्बुद्धि दे
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इस अर्थ-प्रधान युग में मनुष्य को अपनी गृहस्थी चलाने के लिए तमाम पापड़ बेलने पड़ते हैं। व्यापारी दिन-रात काम करता है। किसान खेतों में पसीना बहा...
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Thursday, September 27, 2018
लचीला रे...
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प्रोमोशन में आरक्षण संबंधित 2006 का फैसला बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों के विवेक पर छोड़ते हु...
Wednesday, September 5, 2018
लोभ और भय के बीच बेवक्त ऊँघना
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स्कूल की क्लास में तीसरी घंटी के बाद बड़े-बड़े तुर्रमखां पढ़ाकुओं की अकड़ भी ढीली पड़ जाती थी। गुरुजी चाहे जितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, और उन...
Sunday, July 29, 2018
खुद की सोचो
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शांता, देखती हूँ, तुम दिनोदिन सूखती जा रही हो? ये बात सही है कि बच्चों का ख्याल तुम नहीं रखोगी तो कौन रखेगा! पर जरा सोचो, खाली पेट काम करते-...
Sunday, June 10, 2018
खुशफ़हम जिंदगी
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उन्नीस साल बाद अपने ससुराल से जिस उपाधि की मुझे प्रतीक्षा थी आख़िरकार वह मिल गयी। यह जानकर कि 'मैं बिल्कुल अपनी सास जैसी हो गयी हूँ' ...
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Monday, March 19, 2018
आत्ममुग्धो भव...!
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कुछ लोग अपने काम और नाम की बातों को प्रस्तुत करने में इतने माहिर होते हैं कि उन्हें कभी भरोसा ही नहीं होता कि उनसे बेहतर कोई दूसरा भी यह काम...
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