टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Friday, July 24, 2020

कम-अक्ल औरतें भी न...

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व्यर्थ जल रही  बिजली  और पंखों का   स्विच  बार-बार  ऑफ कर देती हैं! कम-अक्ल औरतें भी न हद करती हैं। घिसा हुआ साबुन टूथ पेस्ट की पिचकी हुई ट्...
2 comments:
Friday, June 5, 2020

पीढ़ियाँ

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हर साल की तरह इस बार भी होली की छुट्टी में पंडित केशरी नाथ दूबे के घर में चहल-पहल बढ़ गयी थी। गाँव के लोग उन्हें केसरी बाबा के नाम से जानते त...
Monday, May 18, 2020

सन्नाटा

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आज दैनिक जागरण 'साहित्यिक पुनर्नवा' में छपी लखुकथा 'सन्नाटा' अपनी सामंती कुलीनता बोध से प्रेरित मालकिन जब भी झाड़...
Friday, May 15, 2020

नज़रबट्टू

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दैनिक भास्कर के 'मधुरिमा' में छपी मेरी कहानी 'नजरबट्टू'              पिछले कितने ही वर्षों की घटनाएं, किसी फिल्म...
Tuesday, May 12, 2020

वार्डरोब

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लॉकडाउन में विधाता ऐसे पशोपेश में डाल देंगे यह कभी सोचा न था। बहुत दिनों से अपार्टमेंट के बाहर निकलना नहीं हुआ था। होम डिलीवरी की सुविधा ने ...
Monday, May 4, 2020

ऑनलाइन शिक्षा में कितनी समानता?

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लॉकडाउन में ऑनलाइन शिक्षा पद्धति को अपनाते सभी शैक्षिक संस्थानों कक्षा नर्सरी से लेकर जूनियर हाईस्कूल स्कूल, इंटर, कॉलेज से लेकर विश्वविद्या...
1 comment:
Saturday, April 25, 2020

आ अब लौट चलें

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लॉक डाउन में इस बात से मध्यमवर्ग भली-भाँति परिचित हो गया होगा कि जिंदगी, जिसको हमने बहुत कठिन बना रखा था वह कितनी आसान है। कम से कम सुविधाओं...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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