टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Saturday, April 25, 2020

आ अब लौट चलें

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लॉक डाउन में इस बात से मध्यमवर्ग भली-भाँति परिचित हो गया होगा कि जिंदगी, जिसको हमने बहुत कठिन बना रखा था वह कितनी आसान है। कम से कम सुविधाओं...
Monday, April 20, 2020

लॉकडाउन में अच्छे हैं

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लॉकडाउन से पूर्व सुबह-सुबह किचेन में घुसने पर पूरा सिंक जूठे बर्तन से भरा मिलता था। कामवाली के इंतजार में किसी तरह एक कप चाय बनाकर धीरे-धीरे...
Wednesday, April 15, 2020

विनाशकाले विपरीत बुद्धि

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कोरोना की महामारी में देश शाहीनबाग से उबरकर तब्लीगी मरकज़ में उलझा ही था कि अब बांद्रा स्टेशन पर जाकर फंस गया। यहाँ हजारों की संख्या में गुमर...
Monday, April 6, 2020

पुकार में दम है।

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मोदीजी, आप ने देख ही लिया कि देश की जनता आपकी पुकार पर कुछ भी करने को तैयार है। इसलिए आप सावधान हो जाइए।  जनता तो ठहरी भोली-भाली! आप जितना क...
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Friday, January 17, 2020

नइहर के नेवता

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       कादम्बिनी पत्रिका में 'नइहर के नेवता' अपनी भतीजी वृंदा की शादी में सितली फुआ अपने गवने के पैंतीस-चाली...
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Thursday, August 8, 2019

गुलाम हो या आजाद?

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तू आजाद बताता खुद को नबी गुलाम ये बात बता। कश्मीरी को कहे बिकाऊ पर खुद की औकात बता।। किया गुलामी खानदान का जो नेहरू ने छोड़ा था। घाटी स...
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Thursday, August 1, 2019

जमाने की छुआ-छूत

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अभी एक सज्जन जिन्होंने #zomato के अपने खाने का ऑर्डर इसलिए कैंसिल कर दिया क्योंकि डिलीवरी बॉय उनके पसंदीदा धर्म का नहीं था। इससे हमें एक बहु...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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