टूटी-फूटी
एक गृहिणी की डायरी...
Sunday, July 29, 2018
खुद की सोचो
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शांता, देखती हूँ, तुम दिनोदिन सूखती जा रही हो? ये बात सही है कि बच्चों का ख्याल तुम नहीं रखोगी तो कौन रखेगा! पर जरा सोचो, खाली पेट काम करते-...
Sunday, June 10, 2018
खुशफ़हम जिंदगी
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उन्नीस साल बाद अपने ससुराल से जिस उपाधि की मुझे प्रतीक्षा थी आख़िरकार वह मिल गयी। यह जानकर कि 'मैं बिल्कुल अपनी सास जैसी हो गयी हूँ' ...
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Monday, March 19, 2018
आत्ममुग्धो भव...!
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कुछ लोग अपने काम और नाम की बातों को प्रस्तुत करने में इतने माहिर होते हैं कि उन्हें कभी भरोसा ही नहीं होता कि उनसे बेहतर कोई दूसरा भी यह काम...
Wednesday, February 21, 2018
जादुई मसाला
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मां का दिया हुआ यह कजरौटा हर साल दीपावली में सेंके गये काजल से लोड होता है। अपना काम तो सालों-साल इससे ही चल जाता है। लेकिन बगल में खड़ी इस ढ...
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Tuesday, February 13, 2018
अवबोधन
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बसन्त ऋतु में प्रीति को अपना नया-नवेला साजन मिला था। उसके चारों ओर एक खुशबू की बयार सी बह रही थी। लेकिन जल्दी ही उसको अपने छोटे भाई की शादी ...
Wednesday, August 23, 2017
अधूरी आशा
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शायरा आज दस बजे से ही टीवी से चिपकी थी। दिन भर चैनेल बदल-बदलकर एक ही ख़बर देखती रही। सास-बहू वाले सीरियल भी आज इस ख़बर के आगे फीके थे। ठीक पाँ...
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Monday, July 24, 2017
चक दे छोरियों
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आज मैं लड़कियों को विश्व स्तर पर क्रिकेट खेलते हुए देखकर अभिभूत हूँ। ऐसा लग रहा है मानो मेरा बचपन का सपना पूरा हो गया है। इन्हें देखकर स्कूल...
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