टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Wednesday, August 23, 2017

अधूरी आशा

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शायरा आज दस बजे से ही टीवी से चिपकी थी। दिन भर चैनेल बदल-बदलकर एक ही ख़बर देखती रही। सास-बहू वाले सीरियल भी आज इस ख़बर के आगे फीके थे। ठीक पाँ...
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Monday, July 24, 2017

चक दे छोरियों

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आज मैं लड़कियों को विश्व स्तर पर क्रिकेट खेलते हुए  देखकर अभिभूत हूँ। ऐसा लग रहा है मानो मेरा बचपन का सपना पूरा हो गया है। इन्हें देखकर स्कूल...
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Saturday, July 22, 2017

सावन के महीने में शिवकृपा

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कॉलेज़ में परीक्षा हो जाने के बाद की छुट्टियाँ थी। मैं अपनी बुआ के घर आयी हुई थी। सावन का महीना था और पहला सोमवार भी। रिमझिम बारिश हो रही थी।...
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Saturday, July 1, 2017

बहू-अधूरी

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ससुराल में दो साल बीत गये। कमली की सारी कोशिशें नाकाम साबित हो रही थी। पूर्वा के मुकाबले वह कहीं नहीं टिक पा रही थी। दोनों बच्चों को स्कूल भ...
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Saturday, June 10, 2017

किसान आंदोलन में हिंसा ?

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किसान वास्तव में क्या होता है और उसका मर्म क्या है? यह वही समझ सकता जिसका पूरा जीवन किसानी पर निर्भर हो। "हरियाली लाये खुशहाली" ...
Monday, April 17, 2017

राईट चॉइस

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      दैनिक जागरण 'साहित्यिक पुनर्नवा' में 'राइट च्वॉइस' उत्सव की चमक-दमक के साथ इतनी छुट्टियां कैसे बीत गईं पता ही नह...

जब जिसने जैसा चाहा

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हे नारी तू तो अबला है कहकर हमसे तुम बड़े हो गये जब चाहा हथियार बनाया ढाल बनाकर खड़े हो गये। कह प्रिये, संगिनी जीवन की प्रणयी बनकर पुचकार दिया...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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