टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Saturday, September 24, 2016

कुछ अपने मन की

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बहुत हुआ अब इनकी-उनकी रीति-रिवाज और पोथी से अब थोड़ा आगे बढ़ते हैं चलो आज निकलते हैं कुछ अपने मन की करते हैं तुम निकलो या हम निकले छ...
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Tuesday, September 20, 2016

ईप्सा

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वर्षों पहले  कुछ स्वप्न थे बुने कुछ नींद में सजोये  कुछ ,जगती आँखों में पले  I कर्तव्य पथ पर डटी  अथक, अनवरत   चलती  रही  ...
Saturday, September 17, 2016

छोटा नुस्खा बड़ा फायदा

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यदि आपके हृदय में अपनी हिंदी के लिए तनिक भी प्रेम और सम्मान है तो हिंदी दिवस के प्रति सच्ची श्रद्धा दिखाते हुए अपने ग़ुस्से पर थोड़ा क़ाबू...
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Thursday, August 11, 2016

आस्था का विसर्जन

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यह नज़ारा लखनऊ के मुंशीपुलिया चौराहे की पुलिस चौकी के सामने एक पीपल के नीचे के चबूतरे का है। हिन्दू आस्था की प्रतीक देवी-देवताओं की मूर्त...
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Wednesday, June 29, 2016

बेटियों का अपराध

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किसी घर की छत पर टंगे महिलाओं के अंत:वस्त्र देखकर कुछ असामाजिक तत्व छत फाँदकर उस घर की बहू-बेटियों की इज़्ज़त लूटने की कोशिश कर डालते हैं,...
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Saturday, May 28, 2016

नयी फ्रॉक

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दैनिक जागरण 'साहित्यिक पुनर्नवा' में छपी मेरी कहानी 'नई फ्रॉक' ओसारे में बाँस की खाट पर पड़े-पड़े उसका पूरा शरीर...
Saturday, February 20, 2016

स्वच्छता अभियान की जय हो

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कूड़े वाली गाड़ी आयी  रम पम पम... पों पों पों कूड़ा हम उठायेंगे, लखनऊ स्वच्छ बनायेंगे... रम पम पम... पों पों पों तेज आवाज में यह गाना गात...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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