टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Saturday, February 20, 2016

स्वच्छता अभियान की जय हो

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कूड़े वाली गाड़ी आयी  रम पम पम... पों पों पों कूड़ा हम उठायेंगे, लखनऊ स्वच्छ बनायेंगे... रम पम पम... पों पों पों तेज आवाज में यह गाना गात...
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Wednesday, February 10, 2016

सेल्फ़ी की सनसनी

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एक महिला अधिकारी के द्वारा अपनी निजता के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम मीडिया को इसलिये नहीं सुहा रहा क्योंकि उसने उन्हीं के सव...
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Friday, January 22, 2016

गिद्ध

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जो चला गया वो कायर था। अपने अधिकारों के लिए लड़ना नहीं जानता था। अपने पीछे अपने माता-पिता के सपने और भाई-बन्धुओं की उम्मीदों पर पानी फेर उन्ह...
Tuesday, September 22, 2015

अतिक्रमण पुलिसिया

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आज मैंने अपनी आँखों से एक ऐसे अतिक्रमण का वाकया देखा जो किसी फुटपाथ पर जीविका कमाने वाले ठेले-खोमचे अथवा टाइपराइटर वाले ने नहीं किया। बल्कि ...
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Wednesday, September 2, 2015

बाबू बनल रहें

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दैनिक जागरण 'साहित्यिक पुनर्नवा' में 'बाबू बनल रहें' सात बहनों के बीच उनके इकलौते भाई थे-बाबू। बहुत देवता-पित्तर...
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Monday, August 17, 2015

प्रेम बनाम विवाह

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स्त्री हो या पुरुष- दोनों के जीवन में प्रेम का होना बहुत जरुरी है! प्रेम- यह वो संजीवनी है जिसे पाने की चाह शायद हर प्राणी में होती है। ...
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Thursday, July 30, 2015

वो लाल स्कार्फ

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मेरा वो लाल स्कार्फ! कहाँ होगा...? जो मुझे आज  बिल्कुल भी याद नहीं है। कैसा था वो... कहाँ से लाऊँ उसे...? दिमाग के कपबोर्ड को खंगालते हुए अप...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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