टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Monday, August 17, 2015

प्रेम बनाम विवाह

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स्त्री हो या पुरुष- दोनों के जीवन में प्रेम का होना बहुत जरुरी है! प्रेम- यह वो संजीवनी है जिसे पाने की चाह शायद हर प्राणी में होती है। ...
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Thursday, July 30, 2015

वो लाल स्कार्फ

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मेरा वो लाल स्कार्फ! कहाँ होगा...? जो मुझे आज  बिल्कुल भी याद नहीं है। कैसा था वो... कहाँ से लाऊँ उसे...? दिमाग के कपबोर्ड को खंगालते हुए अप...
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Wednesday, May 27, 2015

मैगी-कांड के साइड-इफ़ेक्ट्स

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खाने के लिए मैगी हो या निभाने के लिए कोई रिश्ता, उसका आनंद सिर्फ "दो मिनट" में मिलता नहीं है। यदि सच्चा आनंद चाहिए तो सभी स्त्री...
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Wednesday, May 13, 2015

आस्तीन में मुंहनोचवा

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सन् 2002-03 की बात है, जब हम लोग नेपाल से सटे पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक जिला मुख्यालय की सरकारी कालोनी में रहते थे। उस समय पूरा शहर 'मुं...
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Wednesday, April 15, 2015

बुरा होना अच्छा है

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आपको नहीं लगता कि एक स्त्री को पूर्ण बनाने में जितना जरूरी उन प्राकृतिक गुणों जैसे- ममता; प्यार; धैर्य, सहनशीलता, त्याग और साहस का होना है, ...
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Saturday, March 21, 2015

नकलची समाज के हाशिए पर लड़कियाँ-

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ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के बारे में उनके अभिभावकों से लेकर अध्यापकों तक की यह सोच कि ज्यादा पढ़ा-लिखा कर इनसे भला कौन सी नौकरी करानी है, इ...
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Sunday, March 8, 2015

महिला दिवस बाद में

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मना लो अम्मा-चाची आज महिला दिवस कल तुम्हारे छोटे बेटे की शादी है न   फिर तो तुम भी हो जाओगी व्यस्त   अपनी नई नवेली दुल्हन के स...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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