टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Wednesday, June 25, 2014

रक्षक ही बने भक्षक

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काश हमारे पास भी इतनी हिम्मत होती कि हम उस पुलिस वाले के नाजायज तरीके से बाइक उठा ले जाने पर पुलिस चौकी के सामने धरना ही दे सकते! लेकिन हमें...
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Tuesday, June 17, 2014

उत्पीड़न विपर्यय

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मेरे अपार्टमेन्ट की फ़्लैट ओनर्स सोसायटी ने जबसे मुझे इसकी जिम्मेदारी दी है तबसे मुझे एक उलझन ने आ घेरा है। महीनों हो गया बिल्डिंग के स्वीपर ...
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Saturday, May 31, 2014

यूपी सरकार का नायाब नुस्खा ‘मुहैया’

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               यूपी सरकार के पास तरक्की के उन नायाब नुस्खों में से एक नुस्खे का कोई जवाब नहीं है! गजब का है यह नुस्खा जिसका नाम ...
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Thursday, May 22, 2014

समाज में असुरक्षित स्त्री

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अपार्टमेन्ट में रात को करीब बारह बजे एक पुरुष दूसरी महिला के साथ अपने फ्लैट में घुसता है… अंदर से चीखने चिल्लाने; घर के दरवाजों की धड़-धड़ और ...
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Wednesday, April 30, 2014

क्या होगा पॉलिटिक्स का..?

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आज जाके हमें यह बात समझ में आ रही है कि सभी दल ‘वादे’ की बात क्यों करते हैं..? असल में वे सभी ‘वादे’ के मतलब को सिद्ध करने पर तुले हुए है- व...
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सोलहवें की बात ही कुछ और है …

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अपना देश आजकल सोलहवीं लोकसभा चुन रहा है। चारो ओर जबरदस्त उत्साह, जोश, और उन्माद सा छाया हुआ है। कुछ वैसा ही माहौल जैसा सोलह की उम्र हमारे जी...
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Wednesday, April 23, 2014

सत्ता का स्वयंवर

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मेरे घर के सामने वाले पार्क की चार दीवारी जिसपर बर्षो से ‘काई’ जमीं पड़ी थी, एक दिन मैने उसकी रंगाई-पुताई के बारे में जानने की कोशिश की तो पत...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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