टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Friday, August 28, 2009

कौन सा दिन सुहाना है...? रविवार...???

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सप्ताह में रविवार सबसे सुहाना होता है यह मेरा नही गणितज्ञों का मानना है। क्या आपने कभी विचार किया है कि यह दिन इतना सुहाना क्यों होता  है? ...
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Thursday, August 20, 2009

चम्पा आई रे...!

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आज मैं बहुत खुश हूँ। मालूम है क्यों? इसलिए नहीं कि किचेन में व्यस्त हूँ बल्कि इसलिए कि आज मेरी चम्पा आ रही है। अब आप पूछेंगे चम्पा कौन है...
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Sunday, July 19, 2009

घरघुसना कहीं का, जब देखो तब अपनी बीबी का मुँह देखता रहता है...

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परिवार को चलाने के लिए माँ-बाप घर के अंदर एक आचार संहिता और कुछ नियम-कानून बनाते हैं। वे यह उम्मीद भी करते हैं कि परिवार में रहने वाले सभी छ...
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Friday, July 10, 2009

चींटी की खटिया खड़ी, टिड्डा करता मौज... कहानी में ट्विस्ट है...!

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हिन्दी भारत समूह से आने वाला एक सन्देश मिला। प्रेषक थे श्री भगवान दास त्यागी जी। इस अंग्रेजी सन्देश में The Ant and the Grasshopper नामक कह...
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Monday, July 6, 2009

कानून की मदद करना मूर्खता है…।

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चलती ट्रेन में सामान चोरी चले जाने की घटना सुनी तो बहुत थी। मेरे श्रीमान्‌ जी मुझे बार-बार सावधान रहने की हिदायत भी दिया करते थे। कभी जनरल य...
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Monday, June 22, 2009

घर में लगा कम्प्यूटर... क्या नीचे क्या ऊपर?

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टूटी-फूटी शुरू करने के बाद एक सज्जन ने मेरे मेल पर सन्देश भेंजा कि उनको कम्प्यूटर के बारे में सरल भाषा में जानकारियाँ चाहिए जो उनके स्कूल मे...
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Tuesday, June 16, 2009

एक भिखारन को सरकारी सम्मान...!?!

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आपने श्रीमती रागिनी शुक्ला की लिखी दो कहानियाँ दुलारी और कर्ज शीर्षक से सत्यार्थमित्र पर पढ़ी और सराही हैं। रागिनी दीदी की लिखी एक और मार...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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