टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Sunday, July 19, 2009

घरघुसना कहीं का, जब देखो तब अपनी बीबी का मुँह देखता रहता है...

›
परिवार को चलाने के लिए माँ-बाप घर के अंदर एक आचार संहिता और कुछ नियम-कानून बनाते हैं। वे यह उम्मीद भी करते हैं कि परिवार में रहने वाले सभी छ...
28 comments:
Friday, July 10, 2009

चींटी की खटिया खड़ी, टिड्डा करता मौज... कहानी में ट्विस्ट है...!

›
हिन्दी भारत समूह से आने वाला एक सन्देश मिला। प्रेषक थे श्री भगवान दास त्यागी जी। इस अंग्रेजी सन्देश में The Ant and the Grasshopper नामक कह...
12 comments:
Monday, July 6, 2009

कानून की मदद करना मूर्खता है…।

›
चलती ट्रेन में सामान चोरी चले जाने की घटना सुनी तो बहुत थी। मेरे श्रीमान्‌ जी मुझे बार-बार सावधान रहने की हिदायत भी दिया करते थे। कभी जनरल य...
9 comments:
Monday, June 22, 2009

घर में लगा कम्प्यूटर... क्या नीचे क्या ऊपर?

›
टूटी-फूटी शुरू करने के बाद एक सज्जन ने मेरे मेल पर सन्देश भेंजा कि उनको कम्प्यूटर के बारे में सरल भाषा में जानकारियाँ चाहिए जो उनके स्कूल मे...
23 comments:
Tuesday, June 16, 2009

एक भिखारन को सरकारी सम्मान...!?!

›
आपने श्रीमती रागिनी शुक्ला की लिखी दो कहानियाँ दुलारी और कर्ज शीर्षक से सत्यार्थमित्र पर पढ़ी और सराही हैं। रागिनी दीदी की लिखी एक और मार...
11 comments:
Saturday, June 6, 2009

हरा ही हरा… पर गाय ने नहीं चरा !? :(

›
सत्यार्थ के मुण्डन के उद्देश्य से गाँव जाना हुआ। करीब दस दिनों के बाद घर वापस आकर देख रही हूँ कि आस-पास काफी कुछ बदल गया है। बेटे के सिर...
12 comments:
Sunday, May 24, 2009

मेरा नाम अन्हरी नही, रीता है...!

›
  उस दिन मेरे गाँव में बड़ा अजीब वाकया हो गया था। एक गरीब के घर बारात आयी थी। अपनी क्षमता के अनुसार स्वागत सत्कार किया था उसने। दूल्हे को व...
19 comments:
‹
›
Home
View web version

परिचय बस इतना सा...

My photo
रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
View my complete profile
Powered by Blogger.