टूटी-फूटी

एक गृहिणी की डायरी...

Sunday, May 24, 2009

मेरा नाम अन्हरी नही, रीता है...!

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  उस दिन मेरे गाँव में बड़ा अजीब वाकया हो गया था। एक गरीब के घर बारात आयी थी। अपनी क्षमता के अनुसार स्वागत सत्कार किया था उसने। दूल्हे को व...
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Tuesday, May 19, 2009

घर में ब्लॉगेरिया का प्रकोप …भूल गये बालम!!!

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मैने सुना था कि आइंस्टीन अपने घर का पता ही भूल जाया करते थे। आज मेरे घर भी कुछ ऐसा अजीबोगरीब हादसा हुआ। यहाँ कसूरवार भौतिकी की कोई उलझन नहीं...
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Thursday, May 14, 2009

मुकदमेंबाज की दवा

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हमारे गाँव के उत्तर-पश्चिम कोने पर एक ब्राह्मण परिवार रहता है। जो वर्षों पहले कहीं बाहर से आये थे और इन्हें गाँव के बड़कवा १ ‘ बाबा ’ के पर...
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Saturday, May 9, 2009

कानून के रक्षक या भक्षक... मानव या दानव?

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पिछले दिनों शहर में डॉक्टर्स और वकीलों के बीच भिड़न्त हो गई। कारण ये कि दो महीने से एक वकील साहब अस्पताल में भर्ती थे, दुर्भाग्यवश ना जाने कि...
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Tuesday, May 5, 2009

सब कुछ उल्टा-पुल्टा… पर अच्छा ही रहा।

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आज रात की भयंकर आँधी ने मेरे घर की चार दिवारी को ढहा दिया। तूफ़ान ने किचेन गार्डेन को क्षत-विक्षत कर दिया। आधी रात को सोते वक्त दिवाल गिरने क...
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Friday, May 1, 2009

क्या हम सभ्य समाज में जी रहे हैं…?

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डार्विन के अनुसार जैविक विकास के विभिन्न चरणों में जीवन संघर्ष के फलस्वरुप सर्वाधिक सफ़ल जीवन व्यतीत करने वाले सदस्य योग्यतम होते हैं। इनकी स...
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Thursday, April 30, 2009

अब मैं भी हाजिर हूँ ... अपनी टूटी-फूटी के साथ

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मेरे अज़ीज हिन्दी चिठ्ठाकार सज्जनों, एक जद्दोजहद मेरे मन में बहुत दिनों से थी। ...आज उसे परे धकेलकर मैने फ़ैसला कर ही लिया। जी हाँ, मैन...
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परिचय बस इतना सा...

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रचना त्रिपाठी
माँ-बाप के दिये संस्कारों के सहारे विज्ञान वर्ग से स्नातकोत्तर तक पढ़ाई करने के बाद उन्हीं के द्वारा खोजे गये जीवन साथी के साथ दो बच्चों को पालने-पोसने में अभी तक व्यस्त रही हूँ ...और सन्तुष्ट भी। नौकरी करना है कि नहीं, इस विषय में सोचने की फुरसत अभी तक नहीं मिल पायी; और जरूरत भी नहीं महसूस हुई। लेकिन अब जब बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो समय के अच्छे सदुपयोग के लिए कुछ नया काम ढूँढना पड़ेगा। शायद एक खिड़की इस ब्लॉग जगत की ओर भी खुलती है...।
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